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'स्कीम'

Posted On: 4 Oct, 2016 कविता,Politics,Social Issues में

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हाल हुआ ऐसा भारत

सब डटे आग़ में मूत रहे

और नए-नए ‘स्कीम’ चलाकर

जन-नायक जन लूट रहे ।१।



अरे ! गन गाए जिन नेता के हम

हमें अकेला छोड़ गए

और परिवर्तन में सत्ता के हम

हवलदार से चोर भये  ।२।


दौड़े थे दस मील नगद

खाये थे कौवे, चील, उड़द

सब खाया-गाया व्यर्थ गया

वो हमारी नइया लील गए ।३।


ये करें घोटाले 2G के

और 3G में स्कैम बड़े

सब लूट रहे नित-नित उठ-उठ

हम दिन भर  बस स्पैम पढ़ें  ।४।


स्वव्यस्त



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2 प्रतिक्रिया

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नवीनतम प्रतिक्रियाएंLatest Comments

Keshawn के द्वारा
October 17, 2016

That really cartepus the spirit of it. Thanks for posting.

स्वव्यस्त के द्वारा
July 8, 2017

I’m very happy to know that you perceived it. Thank You So Much …


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